शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

समस्वर की व्याख्या

गुरू का उपदेश है कि सतत् अवतार पुरूष के ध्यान के अभ्यास द्वारा व्यक्ति ब्रम्ह के साथ सीधे सम्पर्क में हो जाता है । यह अभ्यास इतना विकसित करने की गुरू की अनुशंसा है कि अवतार पुरुष का ध्यान व्यक्ति का आम स्वभाव ही बन जाय । ऐसा अभ्यास होने की दशा में ही व्यक्ति मृत्यु का समय आने पर इस शरीर को त्यागने के समय ब्रम्ह का ध्यान कर सकेगा । 

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