भगवद्गीता
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016
योग अग्नि
गुरू द्वारा ब्रम्ह की स्थिति पाने के उपाय में वर्णित योगाभ्यास की शक्ति द्वारा अर्थात् आत्मा को ब्रम्ह के भाव में युक्त रखते हुये
,
माया के प्रति मोंह को ब्रम्ह चेतना की अग्नि में भस्म करने से उसका अस्तित्व निरापद ब्रम्ह में विलीन हो जावेगा ।
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