ब्रम्ह का ध्यान करने के लिये लक्ष्य निर्धारित करते हुये गरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि व्यक्ति को ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति आत्मा
जो कि इस रूप संसार की शासक है, सूक्ष्मतम् है, सभी रूपों का आधार है, जिसका रूप अग्राह्य है, जो कि अंधकार का नाश करने में सूर्य की
ज्योति के समान है का ध्यान करना है ।
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