गुरू द्वारा बतायी गई वेदों में वर्णित विष्णु परम् पद, अक्षर स्थिति वह स्थिति होती है जिसमें
पहुँचने के बाद व्यक्ति दोबारा माया की मोंह की ओर वापस नहीं लौटता है । विदित है
कि यह स्थिति प्रकृतीय मोंह के त्याग के बाद ही होती है । मोंह छूटने के बाद भी
पुन: वापस ग्रसने वाला होता है । विष्णु परम् पद मोंह से मुक्ति का वह स्तर है
जहाँ से पुन: मोंह में वापस लौटने का भय नहीं रह जाता है ।
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