भगवद्गीता
सोमवार, 15 फ़रवरी 2016
प्राण विसर्जन
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति शांत मस्तिष्क की स्थिति में
,
अपनी मुझमें समर्पित भक्ति के द्वारा योगाभ्यास की शक्ति से अपने एकाग्र ध्यान की स्थिति में अपने मोंह का त्याग करता है वह व्यक्ति परम् ब्रम्ह को प्राप्त होता है ।
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