मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

सतत् एकाग्रता

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि जो व्यक्ति सतत् मेरा चिंतन करता है, अपने ध्यान को किसी अन्य में विचलित नहीं होने देता है, ऐसे योगी का आचरण सतत् मर्यादित होता है, ऐसा योगी आसानी से मुझे पाता है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें