भगवद्गीता
बुधवार, 3 फ़रवरी 2016
परिवर्तनशील
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कहे कि हे अर्जुन इस संसार के समस्त रूपों का सृजन मेरी परिवर्तनशील प्रकृति द्वारा हुआ है
,
इस संसार की समस्त दैविक वृत्तियों का आधार मेरी अ-परिवर्तनशील प्रकृति है
,
समस्त बलिदानों का आधार मैं स्वयं हूँ ।
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