ब्रम्ह को अधिक सक्षमता से प्रगट
करने वाले स्वरूप की गणना को और आगे बताते हुये गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को
बताये कि मैं सभी जीवों को खा जाने वाली मृत्यु हूँ औय्र जिनका अभी इस संसार में
प्रादुर्भाव नहीं हुआ है उनका जन्म हूँ और जीवों के जीवन के स्त्रीलिंग स्वभाव के
परिवर्तनों में मैं उनकी ख्याति, सम्पन्नता, वाणी, स्मृति, बुद्धि कुशाग्रता,
दृढता और धर्य हूँ ।
एक संदेश
अपने चेतन स्वरूप के
प्रति सचेत होवें । चेतन स्वरूप जो कि सदैव अपने स्वरूप में स्थिर रहता है । आप
चाहे जागृत दशा में हैं अथवा स्वप्न दशा में है अथवा गहरी नीद की दशा में हैं चेतन
स्वरूप सदैव अपने चेतन स्वरूप में ही
रहता है । इस चेतन स्वरूप के प्रति निरंतर सचेत रहना आपकी पूर्णता है ।
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