अर्जुन गुरू के सम्मुख अपनी विनय प्रार्थना
को और आगे बढाते हुये बोला कि हे सर्वस्य के स्वामी आपके मुखसे मैंने परम् ब्रम्ह
के अखण्ड अविभाज्य रूप के सम्बंध में जो कुछ भी सुना वह सब सत्य है परंतु हे प्रभु
मुझे कृपा पूर्वक अपने उस दिव्य स्वरूप के दर्शन कराइये ।
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