बुधवार, 21 दिसंबर 2016

रूप विस्तार : चरण 18

ब्रम्ह को अधिक सक्षमतासे प्रगट करने वाले स्वरूप की गणना को और आगे बताते हुये गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि दण्ड देने वालों में मैं दण्ड का मानक हूँ, जो लोग विजय प्राप्त करते हैं मैं उनकी नीति हूँ, गोपनीय वस्तुओं में मैं मौन हूँ और ज्ञान प्राप्त ज्ञानियों में मै ज्ञान हूँ । 
एक संदेश
अपने चेतन स्वरूप के प्रति सचेत होवें । चेतन स्वरूप जो कि सदैव अपने स्वरूप में स्थिर रहता है । आप चाहे जागृत दशा में हैं अथवा स्वप्न दशा में है अथवा गहरी नीद की दशा में हैं चेतन स्वरूप सदैव अपने चेतन स्वरूप में ही रहता है । इस चेतन स्वरूप के प्रति निरंतर सचेत रहना आपकी पूर्णता है ।  

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