यह समस्त रूप संसार अखण्ड, अविभाज्य, अनंत ब्रम्ह की महिमा का मात्र आंशिक अभिव्यक्ति है । इस रूप
संसार में विकीर्ण समस्त वैभव ब्रम्ह की चमकती हुई महिमा मण्डल के मात्र एक किरण
से प्रकाशित है । ज्ञान के जिज्ञासु साधक को ब्रम्ह की इस महिमा का ध्यान कर
प्रयत्नमें संलग्न होना अपेक्षित होता है ।
इसके साथ विभूति योग नामक दशवाँ
अध्याय पूर्ण हुआ
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