अर्जुन की जिज्ञासा की तुष्टि के
लिये समस्त रूप विस्तार सम्बंधी उपदेश करने के उपरांत गुरू योगेश्वर श्रीकृष्न
अर्जुन से कहे कि परंतु यह सब कुछ तुम्हे जानने की क्या आवश्यकता है ? मैं इस समस्त रूप संसार को मात्र अपने
अस्तित्व के अंश मात्र से इस रूप संसार के समस्त रूपों को वेध करके सम्बल देता हूँ
।
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