बुधवार, 7 दिसंबर 2016

तर्क-निष्कर्श-सत्य

हिंदू धर्मा दर्शन के विभिन्न ग्रंथों में भिन्न भिन्न स्तर के तर्क की कवायद की गई है । इस प्रक्रिया में साक्ष्य के रूप में उद्घृत दृष्टांतों को दर्शन में “जप” कहा गया है । पुन: एक तर्क को दूसरे तर्क से परास्त करने के दृष्टांतों को “वितण्ड” कहा गया है । अंत में अंतिम निर्णय के रूप में निकाले गये निष्कर्श को “वद” कहा गया है । इन समस्त “वद” के परोक्ष में स्थित “परम् सत्य” को “प्रवद्तम” कहा गया है । “प्रवद्तम” ब्रम्ह स्वरूप है ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें