हिंदू धर्मा दर्शन के विभिन्न
ग्रंथों में भिन्न भिन्न स्तर के तर्क की कवायद की गई है । इस प्रक्रिया में साक्ष्य
के रूप में उद्घृत दृष्टांतों को दर्शन में “जप” कहा गया है । पुन: एक तर्क को
दूसरे तर्क से परास्त करने के दृष्टांतों को “वितण्ड” कहा गया है । अंत में अंतिम
निर्णय के रूप में निकाले गये निष्कर्श को “वद” कहा गया है । इन समस्त “वद” के
परोक्ष में स्थित “परम् सत्य” को “प्रवद्तम” कहा गया है । “प्रवद्तम” ब्रम्ह
स्वरूप है ।
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