भगवद्गीता
शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016
जन्म और मृत्यु
अर्जुन अपनी मन:स्थिति को और आगे व्यक्त करते हुये कहता है ! हे कमलनयन परम् ब्रम्ह स्वरूप मैं आपके मुखसे इस रूप संसार के सृजन और उनके विलय के समबन्ध में विस्तार से सुना है ।
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