इस रूप संसार की समस्त रूप रचनाओं
में प्रयुक्त बुनियादी पदार्थ ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति के अवयव हैं । इन समस्त
रूपों को उनके सृजित रूपों में स्थिर रखने का दायित्व ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति
निर्वाह करती है । अंत में इन समस्त रूपों का विलय भी “शिव” रूप ब्रम्ह में ही
होता है । यह समस्त प्रक्रिया ब्रम्ह की प्रकृति का ही सम्पादन है । इसी रूप में
ब्रम्ह ही समस्त रूप संसार के समस्त रूपों का आदि, मध्य तथा अवसान होता है ।
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