आत्मा के आत्मविज्ञान का दर्शन हमें
अज्ञान के नाश का पथ प्रशस्थ करता है । आत्मा का आत्मविज्ञान हिंदू धर्मदर्शन के
अनेक ग्रंथों यथा चारो वेद, वेदांतसूत्र, 10 पुराणों, तथा भगवद्गीता में विस्तार पूर्वक वर्णित हैं । इस रूप में
उपरोक्त सभी ग्रंथ ब्रम्ह को अधिक सक्षमता से व्यक्त करने वाले हैं ।
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