शनिवार, 17 दिसंबर 2016

रूप विस्तार : चरण 16

ब्रम्ह को अधिक सक्षमता से प्रगट करने वाले स्वरूप की गणना को और आगे बताते हुये गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि छल के क्षेत्र में मैं जूआ हूँ, भव्य की मैं भव्यता हूँ, मैं विजय हूँ, मैं प्रयत्न हूँ और मैं अच्छे की अच्छाई हूँ । 

एक संदेश
अपने चेतन स्वरूप के प्रति सचेत होवें । चेतन स्वरूप जो कि सदैव अपने स्वरूप में स्थिर रहता है । आप चाहे जागृत दशा में हैं अथवा स्वप्न दशा में है अथवा गहरी नीद की दशा में हैं चेतन स्वरूप सदैव अपने चेतन स्वरूप में ही रहता है । इस चेतन स्वरूप के प्रति निरंतर सचेत रहना आपकी पूर्णता है ।  

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