मंगलवार, 14 अप्रैल 2015

सही के चुनाव द्वारा मुक्ति

सही के चुनाव द्वारा, ईश्वर के प्रति समर्पण से युक्त, अहंकार का त्याग कर के, इच्छा का पूर्ण मर्दन करके मनुष्य प्रकृतीय मोंह से पूर्ण मुक्ति पा सकता है । मुक्ति की दशा इस जीवन के रह्ते हुये ब्रम्ह का अनुभव, ब्रम्ह की शांति देने वाली होती है । जीवन के कलह, त्रास, अशांति सभी लुप्त हो जावेंगे ऐसा संत कार्य तो सभी करेगा परंतु फल के लिये नहीं अपितु ब्रम्ह की  सेवा के लिये ।

इस प्रकार भागवद्गीता का बुद्धियोग नामक दूसरा अध्याय पूर्ण हुआ । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें