गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि फल की इच्छा से कार्य करना मात्र एक भ्रम
होता है । एक मुक्त आत्मा का व्यक्ति बिना फल की कामना के कार्य करता है वही कार्य करने का सच्चा मार्ग
है । मुक्त पुरुष कहता है कि मैं कार्य करूँ या ना करूँ मुझे कोई अंतर नहीं पडता
है । मैं कार्य इसलिये करता हूँ कि शरीर कार्य करने में सक्षम है तो मैं कार्य
क्यों ना करूँ ।
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