स्वयँ
अपने विषय में गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कहते हैं कि तीनो लोको में कोई ऐसा
कार्य नहीं है जिसे किया जाना मुझसे अपेक्षित है अथवा किसी अ-प्राप्त को प्राप्त
करने के लिये मुझे करना है परंतु फिरभी मैं कार्य करता हूँ । यदि मैं कार्य करना
बंद करदूँ तो पूरा संसार समाप्त होकर बिना अस्तित्व में पर्णित हो जावेगा ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें