मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

कर्म के उदाहरण

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि जिसे आत्मज्ञान प्राप्त हो गया है वह बिना किसी स्वार्थ की पूर्ति की अभिलाषा के समुदाय के लिये कार्य करता है । इस कथन के समर्थन में वह राजा जनक का उदाहरण भी बताते है कि राजा जनक पूर्णरूप से मुक्त थे परंतु बिना किसी लिप्सा के समुदाय के हित के लिये कार्य करते थे । जिन व्यक्तियों को ज्ञान नहीं प्राप्त हुआ है परंतु वह ज्ञानप्राप्ति के लिये प्रयत्नशील हैं ऐसे व्यक्ति इन आदर्श मुक्त व्यक्तियों के कर्मों से उदाहरण ग्रहण करते हैं । 

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