गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि जिसे आत्मज्ञान प्राप्त हो गया है वह बिना
किसी स्वार्थ की पूर्ति की अभिलाषा के समुदाय के लिये कार्य करता है । इस कथन के
समर्थन में वह राजा जनक का उदाहरण भी बताते है कि राजा जनक पूर्णरूप से मुक्त थे
परंतु बिना किसी लिप्सा के समुदाय के हित के लिये कार्य करते थे । जिन व्यक्तियों
को ज्ञान नहीं प्राप्त हुआ है परंतु वह ज्ञानप्राप्ति के लिये प्रयत्नशील हैं ऐसे
व्यक्ति इन आदर्श मुक्त व्यक्तियों के कर्मों से उदाहरण ग्रहण करते हैं ।
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