गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सृष्टि की उत्पत्ति की श्रँखला बताते हुये कहा कि
कर्म से यज्ञ की उत्पत्ति होती है, यज्ञ से वर्षा की उत्पत्ति होती है,
वर्षा से अन्न की उत्पत्ति
होती है, अन्न
से जीव की उत्पत्ति होती है । इस प्रकार इस सृष्टि की पूर्ण श्रँखला का मूल कर्म
में निहित है । इसलिये कर्म में सम्मलित ना होना जीव के लिये जघन्य अपराध है ।
अपनी उत्पत्ति के मूल को ही झुठलाना है । इसलिये हे अर्जुन नीयत कर्म करो ।
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