सोमवार, 6 अप्रैल 2015

अनियंत्रित विवेक के फल

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि अ-नियंत्रित विवेक धारक व्यक्ति का मस्तिष्क कभी एकाग्र नहीं हो सकता है । एकाग्रता के अभाव से वह सदैव अशांत दशा में रहेगा । मस्तिष्क जब विभिन्न इंद्रियों के विषयों के पीछे भ्रमण करेगा तो उसका विवेक कभी भी उसके हित में सहायक नहीं हो सकेगा । जिस प्रकार पानी पर तैरती नाव को हवा चलाती है उसी प्रकार उसकी इंद्रियाँ उसे कभी स्थिर नहीं होने देंगी । इसलिये हे अर्जुन जब तक मनुष्य अपने को इंद्रीय वासनाओं से समेटेगा नहीं तब तक उसका विवेक एकाग्र नही हो सकता । 

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