बुधवार, 1 अप्रैल 2015

ज्ञानी संत : लक्षण 5

ज्ञानी संत का पाँचवा लक्षण बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कहते हैं कि वह सम्भावित बाह्य बाधाओं को, अपने संयमित विवेक द्वारा अपनी आत्मा को उन्हे पोषित करने से रोक कर, अपने केंद्रित आत्मज्ञान की रक्षा करते हैं । इसके बावज़ूद भी सम्भव है कि इच्छा शेष रह जाय इस भय के निवारणके लिये सतत् अपने अंत:करण की समीक्षा करते रहते हैं । कहने का अभिप्राय यह है कि ऐसे संत बाह्य बाधाओं के निवारण के अतिरिक्त अपनी मानसिक जिज्ञासा का भी निवारण करते है 

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