रविवार, 10 अप्रैल 2016

निरंतर

समस्त जीव रूपों का उत्पन्न होना तथा पुन: प्रकृति में विलय होना यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है । इस प्रक्रिया पर जीव कोटि का कोई नियंत्रण अथवा वश नहीं होता है । इस प्रक्रिया में प्रयुक्त ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति और उच्चतर प्रकृति तथा घटित होने वाली समस्त गतिविधियाँ जीव कोटि के लिये एक रहस्य के रूप में होती हैं । इस समस्त प्रक्रिया का सृजनकर्ता एवं संचालक, ब्रम्ह, सर्वोच्च ज्ञेय रहस्य होता है ।   

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