जिस प्रकार वायु आकाश में है परंतु फिरभी आकाश वायु में नहीं है
। वायु में आकाश का कोई अंश अथवा गुण नहीं है । इसी रूप में प्रत्येक रूप ब्रम्ह
में है परंतु फिरभी ब्रम्ह किसी रूप में नहीं है । ब्रम्ह रूपों के उत्पत्ति का
निमित्त है फिरभी किसी रूप में नहीं है । ब्रम्ह पूर्णतया पारलौकिक है । यह समस्त
रूप संसार उस ब्रम्ह की सृजनात्मक शक्ति द्वारा उत्पन्न हुआ है फिरभी ब्रम्ह पूर्नतया
अपनी उत्पत्ति से भिन्न है ।
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