बुधवार, 6 अप्रैल 2016

सबका आधार परंतु भिन्न

जिस प्रकार वायु आकाश में है परंतु फिरभी आकाश वायु में नहीं है । वायु में आकाश का कोई अंश अथवा गुण नहीं है । इसी रूप में प्रत्येक रूप ब्रम्ह में है परंतु फिरभी ब्रम्ह किसी रूप में नहीं है । ब्रम्ह रूपों के उत्पत्ति का निमित्त है फिरभी किसी रूप में नहीं है । ब्रम्ह पूर्णतया पारलौकिक है । यह समस्त रूप संसार उस ब्रम्ह की सृजनात्मक शक्ति द्वारा उत्पन्न हुआ है फिरभी ब्रम्ह पूर्नतया अपनी उत्पत्ति से भिन्न है । 

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