भगवद्गीता
शनिवार, 23 अप्रैल 2016
उपस्थिति से अनभिज्ञ
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया कि मोंह में भ्रमित व्यक्ति मुझे मनुष्य की शरीर में ढका हुआ निरर्थक अस्तित्व मानते हैं क्योंकि वह मेरी उच्चतर प्रकृति आत्मा को जानते नहीं जो कि समस्त रूपों का आधार है ।
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