शनिवार, 2 अप्रैल 2016

रूप सीमित अभिव्यक्ति

यह रूप संसार मात्र ब्रम्ह का निरूपण है । यह किसी भाँति उसे व्यक्त करने वाला नहीं है । यह संसार यदि न भी होता तो ब्रम्ह जैसा है वैसा ही रहता जबकि यदि ब्रम्ह न होता तो यह संसार होता ही नहीं । कोई भी सीमित स्वरूप उस ब्रम्ह को निरूपित नहीं कर सकता है । संसार के किसी भी रूप में ब्रम्ह को चिन्हित नहीं किया जा सकता है यद्यपि कि प्रत्येक रूप उसके प्रकृति की ही उत्पत्ति है ।

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