ब्रम्ह की महिमा से ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति द्वारा निर्मित
एवं उच्चतर प्रकृति द्वारा पोषित मनुष्य यदि ब्रम्ह के ज्ञान के प्रति जिज्ञासु है, प्रयत्नशील है तो उसके प्रयत्न वाँक्षना के
सुर में हैं, यदि वह ब्रम्ह के ज्ञान के प्रति
उदासीन है तो वह अपने विकास को उन्मुख नहीं है, और कंचिद वह क्रूर क्रियाओं में संलग्न है तो उसके कृत असुरी
श्रेणी के हैं ।
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