अव्यक्त प्रकृति जब रूप धारण करती है और वह अरूपधारी उच्चतर
प्रकृति आत्मा द्वारा प्रकाशित हो जाती है तो रूप प्रगट हो जाते हैं । इस रूप
संसार की प्रगति का स्तर तत्समय प्रकृति में सुलभ आधार बीज़ के ऊपर निर्भर करता हैं
। परंतु इन सभी रूपों को सक्रिय एवं प्रभावी होनेके लिये अरूपधारी प्रकृति आत्मा
द्वारा प्रकाशित होना अनिवार्य दशा होती है ।
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