रविवार, 17 अप्रैल 2016

कर्ता प्रकृति

ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति द्वारा निर्मित शरीर और उसमें उच्चतर प्रकृति आत्मा के अवलम्ब से इस जीव रूप में कर्ता निम्नतर प्रकृति ही होती है और आत्मा का तटस्थ भाव से ही कर्म में संलग्न होना अपेक्षित होता है । कर्म से असम्बद्ध रहते हुये कार्य में संलग्न होना । यदि कंचिद आत्मा ऐसा कर सके तो वह मुक्त रहे । फलत: पुनर्जन्म को बाध्य नहीं होगी । 

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