गुरू का उपदेश विदित करता है कि यह ब्रम्ह के विज्ञान द्वारा
सृजित अद्भुद व्यवस्था है कि समय का चक्र एक निश्चित स्थल पर पहुँचने पर ब्रम्ह की
निम्नतर प्रकृति और ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति इन रूपों को उत्पन्न करना शुरू कर
देती हैं और एक निश्चित स्थल आने पर इन समस्त रूपों का प्रकृति में विलय हो जाता
है ।
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