मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

निर्देशन द्वारा

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि मेरे निर्देशों का पालन करते हुये प्रकृति इस रूप संसार के समस्त चल और अचल रूपों को पैदा करती है और हे कुंती पुत्र इस सृजन का फल होता है कि इस रूप संसार की समस्त गतिविधियाँ चलने लगती हैं । 

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