गुरुवार, 14 अप्रैल 2016

अज्ञान प्रकृति की दासता का फल

ब्रम्ह अपनी प्रकृति को अपने वश में रखता है जबकि ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति आत्मा जिसकी स्थापना निम्नतर प्रकृति निर्मित शरीर में ब्रम्ह का प्रतिनिधित्व करने के उद्देष्य से की जाती है, अज्ञान के प्रभाव से वह अपने मौलिक स्वरूप को विस्मृत कर, प्रकृतीय मोंह के प्रभाव से अहंकार का भाव ग्रहण कर अपना दायित्व निर्वाह करने लगता है । फलत: वह बारम्बार जन्म लेने को बाध्य होता है । 

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