भगवद्गीता
बुधवार, 20 अप्रैल 2016
बेधक और आधार फिरभी भिन्न
परम् ब्रम्ह समस्त रूप संसार के रूपों को बेधने में सक्षम तथा समस्त रूपों को अपने स्वरूप में स्थिर रहने का अधार होते हुये भी सभी से भिन्न है । उनकी प्रकृति ही समस्त रूपों की सृजनकर्ता है
,
समस्त रूपों का आधार है परंतु प्रकृति ब्रम्ह नहीं है ।
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