गुरू का उपदेश विदित करता है कि जो जीव रूप समस्त संसार में
फैला हुआ है वह समय आने पर इस प्रकृति में विलय होने को बाध्य होता है । पुन: समय
आने पर वह रूप धारण करने को बाध्य होता है । इस प्रकार जीवों का उत्पन्न होना और
विलय होना यह दोनों ही समय बद्ध प्रक्रिया है । इनके लिये कोई अलग से कारण नहीं
सृजित होता है । यह ब्रम्ह के विज्ञान का फल है ।
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