सोमवार, 18 अप्रैल 2016

असहाय अज्ञानी आत्मा

आत्मा प्रकृतीय मोंह से अपने को बचा नहीं पाती है । कार्यों को प्रकृतीय गुणों के अधीन करती है । इसलिये वह कर्मफल से बंधती है । पुनर्जन्म के लिये बाध्य होती है । यह उसके लिये असहाय स्थिति होती है । इस स्थिति से उबरने का एक ही उपाय होता है । अज्ञान से उबरना । प्रकृतीय मोंह से उबरना । प्रकृतीय गुणों के अधीन कार्य करने का अभ्यास त्यागना । 

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