गुरू ने सत्य के रहस्य को बताया । पुन: बताया कि तमस् के पथ पर
चलते हुये असुरी कृतों को करने के फल से जीव बारम्बार पुनर्जन्म को प्राप्त होते, इस मोहिनी प्रकृति के भ्रम जाल में फँसे
जीवन जीता है और समस्त द्वैतों के त्रास को भोगते हुये उसे सत्य के ज्ञान का अवसर
नहीं मिलता है ।
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