सोमवार, 25 अप्रैल 2016

सत्य को जाने

ब्रम्ह की अ-परिवर्तनीय प्रकृति आत्मा जो कि अ-रूपधारी होती है ही व्यक्ति का सत्य परिचय होती है । आत्मा के अवलम्ब से प्रकृति का कार्यकारी रूप सृजित होता है परंतु आत्मा का स्वयं अकर्ता होना अपेक्षित होता है । आत्मा का निरंतर प्रकृति के संसर्ग में रहते हुये ब्रम्ह का प्रतिनिधित्व करने का स्वरूप है । व्यक्ति का इस स्वरूप से अनभिज्ञ होना अज्ञान के अंधकार में भटकने के समान है । आत्मा के इस स्वरूप को जानना और इसकी मर्यादानुसार जीवन को ढालना मुक्ति पथ है । 

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