रविवार, 12 जून 2016

ब्रम्ह स्वरूप

गुरू ने ब्रम्ह के रहस्य का जो विस्तार बताया है इससे यह बिलकुल साफ स्पष्ट विदित है कि निराकार ब्रम्ह की किसी रूप विषेस में कल्पना निराधार है । फिरभी उपासक को समझने के लिये किसी रूप का सहारा लेना पडता है । इसी कारण अनेकानेक देवरूपों का प्रचलन सम्भव हुआ है । 

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