गुरू अर्जुन को उपासना पद्धतियों की तुलनात्मक समीक्षा द्वारा
यह बोध कराना चाहते हैं कि सत्य का ज्ञान अर्जित करने के जिज्ञासुओं को वेदों में
वर्णित उपासना के अनुकरण की चेष्टा नहीं करना चाहिये क्योंकि वह उनके लिये एक फँदे
के समान हो जावेगी जिसमें फँसकर वह सुख भोग को उन्मुख हो जावेगें और अपने मुख्य
लक्ष्य से विचलित हो जावेंगे ।
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