भगवद्गीता
रविवार, 26 जून 2016
अर्पण विधि
ब्रम्ह को अर्पित करने की प्रक्रिया में अर्पण का भाव बताने के उपरांत गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्पण की विधि बताते हुये कहे कि हे कुंती पुत्र जो कुछ भी कर्म करो
,
जो कुछ भी ग्रहण करो
,
उसे सेवा भाव से मुझे अर्पित करने के उपरांत करो ।
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