भगवद्गीता
बुधवार, 22 जून 2016
श्रद्धापूर्ण अर्पण
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि जो भी व्यक्ति सात्विक हृदय से श्रद्धापूर्वक एक तुलसी पत्र अथवा एक पुष्प अथवा जल कुछ भी अर्पित करता है मैं उसके अर्पण को ग्रहण करता हूँ ।
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