मंगलवार, 28 जून 2016

कर्मस्वरूप सेवा भाव

कर्म कोई भी किया जाय उसे कंचिद ब्रम्ह की सेवा के भाव में पर्णित करके किया जाय तो वह कर्म सम्पादन ही ब्रम्ह की पूजा में पर्णित हो जायेगा । फिर व्यक्ति को ब्रम्ह की पूजा के लिये अलग से कोई धार्मिक कर्म करने की आवश्यकता नहीं रह जायेगी । समस्त कर्मों का कर्ता ब्रम्ह स्वयं है । हम सेवक ब्रम्ह के कर्म को करके ब्रम्ह की सेवा ही करते है । 

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