गुरू का उपदेश व्यक्त करता है कि उपासक अनेक है । उपासना
विधियाँ अनेक हैं । उपासना के लक्ष्य अनेक है । परंतु प्रत्येक विधि से उपासना
करने वाले, प्रत्येक लक्ष्य की उपासना करने
वाले, प्रत्येक उपासक की उपासना स्वीकार
करने वाला ब्रम्ह एक ही है । इसीलिये जो व्यक्ति जिसभी लक्ष्य से उपासना करता है
उसे वही लक्ष्य मिलता है ।
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