गुरू द्वारा बताये गये उपदेश के अनुसार व्यक्ति वेदों के ज्ञान
पर आधारित उपासना पद्धतियों को अंगीकार करके पुण्य अर्जित करता है जिसके संचय की
वृद्धि होने पर उसे देवलोक में स्थान मिलता है परंतु अर्जित पुण्यों के क्षीण होने
पर उसे वापस पुनर्जन्म की व्यवस्था में लौटा दिया जाता है । इस वापसी के कारण यह
उपलब्धि उच्चतम नहीं होती है ।
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