शुक्रवार, 3 जून 2016

उपलब्धि उच्चतम नहीं

गुरू द्वारा बताये गये उपदेश के अनुसार व्यक्ति वेदों के ज्ञान पर आधारित उपासना पद्धतियों को अंगीकार करके पुण्य अर्जित करता है जिसके संचय की वृद्धि होने पर उसे देवलोक में स्थान मिलता है परंतु अर्जित पुण्यों के क्षीण होने पर उसे वापस पुनर्जन्म की व्यवस्था में लौटा दिया जाता है । इस वापसी के कारण यह उपलब्धि उच्चतम नहीं होती है । 

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