किसी भी उपासना का लक्ष्य उपलब्धि होती है । गुरू ने तुलनात्मक
उपलब्धि के उदाहरण से सर्वोच्च का निर्धारण स्पष्ट किया हैं । गुरू बताये कि
जिन्हे सांसारिक वैभव को पाना लक्ष्य होता है वे व्यक्ति देवताओं की उपासना करते
हैं, जिन्हे आत्मा प्रधान व्यक्तित्व का
जीवन पाना लक्ष्य है वे व्यक्ति अपने समस्त प्रयत्नों को ब्रम्ह को अर्पित करते
हैं और फल स्वरूप ब्रम्ह की दिव्य शांति को पाते हैं । गुरू ने बताया कि यह
उपलब्धि ही सर्वोच्च होती है ।
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