वेदों में वर्णित अहंकार से युक्त उपासना पद्धति व्यक्ति को
देवलोक की उपलब्धि के उपरांत भी वापस पुनर्जन्म की व्यवस्था में लाने का कारण बनती
है । ऐसे व्यक्ति अपनी आत्मा को एक अलग अस्तित्व के रूप में मानते हुये उस आत्मा
के सुखों के लिये उपासना करते हैं । इसलिये उनके प्रयत्न कर्मों के नियम द्वारा
बँधे होते है । फलत: पुनर्जन्म की व्यवस्था में उनकी वापसी होती है ।
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