भगवद्गीता
गुरुवार, 23 जून 2016
अर्पण में भाव की प्रधानता
गुरू द्वारा बताये गये भक्त के अर्पण के सम्बंध में अर्पण का भाव प्रधान महत्व का होता है । अर्पित की जाने वाली वस्तु का मूल्य महत्वपूर्ण नहीं होती है । साधारण से साधारण वस्तु आराध्य को अर्पित किया जाय परंतु अर्पण श्रद्धायुक्त होना चाहिये ।
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